Wednesday, October 27, 2010

इक अधूरे सपने सी है ज़िन्दगी की बेरंग तस्वीर मेरी
तू रंगों गुलालों से मुलाक़ात करा दे तो क्या बात है  !!

छाया रहता है वक़्त का पहरा अब चारों ओर मेरे
चंद पल तू इनमें हसीन बना दे तो क्या बात है !!

जाने कहाँ ले जाए मुझे यह आग बरहम* की
तू इक दफ़ा प्यार की बौछार गिरा दे तो क्या बात है !!

सौ लोगों का मजमा* अब क्या दे पायेगा मुझे
चार हमदर्दों की तू महफ़िल सजादे तो क्या बात है !!

बातों से दिल जीतना अब जैसे आम बात है
कोई गीत तू बेमिसाल सुना दे तो क्या बात है !!

ग़मों का बोझ लेकर अब आगे बढ़ने की हिम्मत कहाँ
तू राह में खुशियों की चादर बिछा दे तो क्या बात है !!

ज़रूरतों का लेन-देन तो जैसे उम्र भर साथ रहेगा
चंद ख्वाहिशें तू मुझ पर उधार चढ़ा दे तो क्या बात है !!

अपनों के अपनाने का है वाज़ेह* गुमान* मुझे
किसी अजनबी से ग़र तू साज़ मिला दे तो क्या बात है !!

ज़िन्दगी की भूल-भुलैया में अब थक सा गया हूँ
तू मंजिल की इक तस्वीर दिखा दे तो क्या बात है !!

1. बरहम : Angriness
2. मजमा : Crowd
3. वाज़ेह : Obvious
4. गुमान : Proud

Saturday, October 16, 2010

न मेरा कुछ था , न कुछ जैसे अब मिल पायेगा
गर कुछ हैसियत है, तो है  इन यारों की दोस्ती !!

कहाँ भाई संभालेगा और क्या समझा पाएगी वो बहन
अब मुझे अपनाने वाली हमदर्दी है , इन यारों की दोस्ती !!

शायद अब तक खुदा मुझसे सिर्फ छीन ही रहा था
पहली बार इक अनमोल तोहफे में मिली , इन यारों की दोस्ती !!

इतने अरसे से जो दिल में  "मैं" की तन्हाई थी
अब वहीं  "हम" का जज़्बा है , इन यारों की दोस्ती !!

कितनी शराफतों की हिदायत दे दुनिया वाले  मगर
इक अटूट पागलपन का ख़ुमार है , इन यारों की दोस्ती !!

तुम चाहे करो हज़ारों खर्च अपनी आशिक़ी के लिए
मेरे लिए वो " दस रूपए उधार " है , इन यारों की दोस्ती !!

किताबों के चंद पन्नो से ज़िन्दगी बनाना तो सीख लिया
पर ज़िन्दगी "जीने" का असली मक़ाम है , इन यारों की दोस्ती !!

अब से कुछ फरमाइश नहीं रहेगी तुझसे मेरे खुदा
बस मेरे जहाँ में हरदम महफूज़ रहे , इन यारों की दोस्ती !!